दर्पण
सीमा खाने की टेबल समेटते हुए कल का मेनू भी सोच लेती है, आखिर सुबह उठते ही सोफे से ले कर बालकनी में पड़ी कुर्सी तक उसका धयान अपनी ओर आकर्षित करते थे। वह इतनी आसानी से उनके उपर जमी धूल की परत को नजरअंदाज भी नही कर पाती। इस उधेड़बुन में एक बार तो उसे लगा जैसे आकाश ने उसके कंधे पर हाथ रखा, पीछे मुड़ी तो मुँह चिढ़ाता हुआ ठंडे पानी का बोतल खाने की मेज पर पड़ा था। कमरे में आई तो देखा आकाश खर्राटे ले रहा था। एक नजर डाल उसने भी आँखें बंद कर ली।
चिड़ियों की चहचहाहट ने भोर होने की सूचना दे दी। अलसाया तन और मन कतई सीमा को उठने की अनुमति नही दे रहा था। बाथरूम से निकल के सीधा किचन की ओर रूख किया। चाय के पानी को उबलते देख सोचा क्या जिंदगी है इसकी भी खुद उबल के दुसरे को सुकुन देना। सीमा फटाफट अपने तैयार किए गए मेनू की तैयारी में लग गई।
अचानक घंटी बजी तो झुंंझलाहट में उसने दरवाजा खोला। सामने विमला खड़ी थी। स्वभाव से बहुत सरल विमला पिछले दो वर्षों से उसके यहाँ काम करती है। अब तो विमला उसके घर का एक अहम हिस्सा बन गई थी। वैसे तो वह ज्यादा नही बोलती थी पर आज उसकी चुप्पी सीमा को खल रही थी। बहुत कुरेदने पर वो बोली, "क्या बताऊँ बीबीजी आज फिर से राधा को उन लोगों ने मारा और धमकाया है।"
राधा विमला की एकलौती संतान थी। विमला और उसके पति ने मिल कर अपना परिवार छोटा रखने का निर्णय लिया था। दोनों अपनी छोटी सी दुनिया में खुश थे। विमला बातों ही बातों में अकसर कहती कि बच्चे की अच्छी परवरिश करना माँ बाप की जिम्मेवारी होती है । उसने कभी भी राधा को कोई कमी नही होने दी। दोनो पति पत्नी अपनी बिटिया को एक अच्छी जिंदगी देने के लिए काफी मेहनत करते थे।
सीमा को विमला के आधुनिक सोच पर बहुत गर्व महसूस होता था। कुछ दिनों से विमला के पति की तबियत खराब चल रही थी। वो चाहते थे कि कुछ दिनों के लिए राधा घर आकर उनकी देखभाल करे। राधा के ससुराल वाले इस छोटी सी बात के लिए राजी न थे। अब तो वो लोग उसे आए दिन मारने पीटने भी लगे थे।
उम्र के साथ हर इंसान तन और मन दोनो से कमजोर हो जाता है। अपनी बेटी की विवशता देख दोनों का मन आहत था। इस से ज्यादा खुद को तिरस्कृत शायद ही उन्होनें कभी पाया होगा। फर्श पर गिरे आँसु की बूँदें उसके दर्द बयां कर रहे थे। विमला की मनोस्थिति से अवगत सीमा ने उसे फल और दवा के लिए पैसे देते हुए घर जाने का आदेश दिया।
दरवाजे की ओर बढ़ते कदम रूके और सहसा वह बोल उठी, "बीबीजी बस एक गलती हो गई हमसे, राधा को और पढ़ाना चाहिए था।" सीमा को विमला की भीगी पलकों में उसकी कमजोरी नही बल्कि किसी आँधी के आने से पहले की शांति नजर आ रही थी।
मंद मुस्कान के साथ वह अपने अधूरे काम निपटाने लगी।
मंद मुस्कान के साथ वह अपने अधूरे काम निपटाने लगी।
Wahhh...bahut badhia..
ReplyDeleteThank you :)
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