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Tere liye

वो  बचपन  की  प्यार  भरी  धुप जहाँ  हर  पल मुझे  साया  देती  तू तेरी  आँचल  में  मेरा  वो  छुपना इन  मीठी  यादों  का  कैसे  पाऊं  कोई  कोना कितनी  रातें  तुने  जागते  हुए  बितायी  है ये सोच के जाने  क्यूँ आँख  भर  आई  है तेरी वो झिडकियां आज  भी  महसूस  करती  हूँ वो हर एक पल  को  आज  भी  महफूज़  रखती  हूँ  ये  सच  है  तेरे  पास  नहीं  हूँ  मैं  ज़िन्दगी  की  भाग  दौड़  ने  कोसों  किया  मुझे  दूर पर  जब  भी  तुझे याद किया ,दिखाई दिया बस तेरा ही नूर कहते सुना है  लोगों  को, दुनिया  में  तू  नहीं  तो  कुछ  नहीं मेरे  लिए  तो  तू  नहीं  तो  दुनिया क्या, मेरा वजूद ही नहीं  माँ...