Kaisi yeh Paheli

कल  तक  बस  एक  खेल  था  जो
अब  आये  ना  वो  समझ


अक्सर  सुनते  और  सुलझाते  उसको
मैं  खुद  ही  उसमे  जाऊं  उलझ


अज़ब  सी  है,  ये  कैसी  माया
जिसे  अब  तक  मैं   समझ  ना पाया


है  एक  पहेली  ऐसी
जिसे  सुलझाओ   तो  मैं  जानुं


है  एक  कहानी  ऐसी 
जिसे  सुन  पाओ तो  मैं  मानू
       

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