तेरे जाने के बाद
कितनी खुश थी वो आज । बार बार दरवाजे की ओर जाती और कमरे में वापस आ जाती। नैनिका के आने में अभी काफी समय था पर एक माँ की बेचैनी को समझ पाना आसान ना था।
खैर, माँ के लिए जैसे वक्त का पहिया थम सा गया था। किचन की तरफ रूख करते हुए उन्होंने सोचा कि एक नजर डाल लेना ही बेहतर है। वैसै तो नैनिका के पसंद का सब कुछ बनाया था पर कहीं कुछ रह ना जाए। आते के साथ ही कहेगी, मम्मी पहले चाय पिला दो, खाना कुछ देर बाद।
इधर नैनिका का भी हाल वही था। मन ही मन कितने प्लान उसने बना लिए थे। माँ के साथ रिक्शा में बैठ के बाजार जाना और वापसी में घेवर याद से खरीदना। अचानक गाड़ी के हार्न ने इन यादों के गलियारे से उसे निकाला।
दहलीज पर कदम रखते ही नजर आई खिलखिलाती हुई माँ।
डोरबेल के आवाज ने उसे वास्तविक्ता से अवगत करा दिया था। माँ जाने के बाद भी अपने बच्चों को खुशी का पल दे जाती है।
वाकई तेरे जाने के बाद यह स्वप्न मेरे लिए मायके जाने के सुखद एहसास से कम न था।
Good one!...feel sorry for the loss...nothing can fill the void though...���� ...in prayers!
ReplyDelete