Ye Tanhaayi.........

बड़े मुद्दत्तों बाद रात ये आई है
जहाँ मैं और मेरी तन्हाई है
आज ख्याल उनका इस कदर आया
लगा की उनकी रुसवाई है

तमन्ना हुई सितारों को आँचल में समेटने की
क्या पता था फासले यूँ बढ़ जायेंगे
चाँद पर भी हक ना रहेगा
और सितारे भी  दूर चले जायेंगे

कश्ती डूब गयी, पता भी ना चला
वक़्त के भंवर ने ऐसा खेल खेला
परायों से क्या शिकवा करना
जब अपनों ने हाथ मेंरा छोडा ........

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